Thursday, December 22, 2011

दिवा- स्वप्न



दिवा--स्वप्न





दिवा स्वप्न देख-देख अब बहुत खुश हो चुकी , 
चैन से रातो को  सोना भी अब तो मुहाल हो गया !
आकाश की गहराइयो को लांधकर बहुत थक चुकी ,
पैर जमीं पर रखना भी अब तो मुहाल हो गया !

पंखो को देखती हूँ अपनी कातर निगाहों से मैं ,
ये कब के कट चुके, अब तो दर्द भी इनका तो मुहाल हो गया ! 
प्यार की रंगीनियों में सिमट जाना चाहती थी,
तेरी बेरुखी को सहना अब तो मुहाल हो गया !

दुरी अब तो मुझसे सही नहीं जाती तेरी ,
यह रस्मे -जुदाई अब तो काटना भी मुहाल हो गया .!
खुशनसीबी पर तेरी मैं  निसार हूँ यारा ,
मेरी जिन्दगी में अब वो उजाला भी मुहाल हो गया !

वो दिल ही क्या जिसमें तेरी कसक न हो ?
तेरी आरजू को दिल में रखना ही अब तो मुहाल हो गया !
रख रखी हैं तेरी यादो को इस मंदिर में सजाए  'दर्शी ',
तेरे संग अब जीना -मरना भी मुहाल हो गया ...!   



"काश,उसे चाहने का अरमान न होता 
दिल होश में होता और वो अनजान न होता ..!
प्यार न होता किसी पत्थर -दिल से मुझे ,
या रब !उससा कोई पत्थर -दिल इंसान न होता ..!"
   

14 comments:

Kailash Sharma said...

दिवा स्वप्न देख-देख अब बहुत खुश हो चुकी ,
चैन से रातो को सोना भी अब तो मुहाल हो गया !
आकाश की गहराइयो को लांधकर बहुत थक चुकी ,
पैर जमीं पर रखना भी अब तो मुहाल हो गया !

....बहुत खूब! लाज़वाब अहसास...बहुत सुंदर भावमयी अभिव्यक्ति..

रश्मि प्रभा... said...

"काश,उसे चाहने का अरमान न होता
दिल होश में होता और वो अनजान न होता ..!
प्यार न होता किसी पत्थर -दिल से मुझे ,
या रब !उससा कोई पत्थर -दिल इंसान न होता ..!"waah, kya baat kahi hai

dheerendra said...

वाह!!!!!!!बहुत सुंदर रचना,,अच्छी लगी,....
मेरी नई रचना के लिए "काव्यान्जलि" मे click करे

Mukesh Kumar Sinha said...

"काश,उसे चाहने का अरमान न होता
दिल होश में होता और वो अनजान न होता ..!
प्यार न होता किसी पत्थर -दिल से मुझे ,
या रब !उससा कोई पत्थर -दिल इंसान न होता ..!"

kya baat hai Darshan jee!! aapne to dil se juri badi gambhir baaten shabdo me uker di..:)
khubsurat rachna!!

संजय भास्कर said...

खूबसूरत। काव्य कौशल की झलक प्रभावशाली है !

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

बहुत सुंदर रचना.

Santosh Kumar said...

या रब !उससा कोई पत्थर -दिल इंसान न होता .

बहुत सुन्दर ..आभार

Suresh kumar said...

Bahut hi sundar likha h ji.

Vaneet Nagpal said...

"टिप्स हिंदी में" ब्लॉग की तरफ से आपको नए साल के आगमन पर शुभ कामनाएं |

टिप्स हिंदी में

vidya said...

बहुत सुन्दर रचना...
सादर.

Urmi said...

आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !
चित्र बहुत सुन्दर लगा! उम्दा रचना!

Naveen Mani Tripathi said...

"काश,उसे चाहने का अरमान न होता
दिल होश में होता और वो अनजान न होता ..!
प्यार न होता किसी पत्थर -दिल से मुझे ,
या रब !उससा कोई पत्थर -दिल इंसान न होता ..!"

lajabab rachana ke liye badhai Darshan ji .

dheerendra said...

बहुत बढिया प्रस्तुति, सुंदर अभिव्यक्ति ......
WELCOME to--जिन्दगीं--

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