उल्फत
तुझसे दूर रहना मेरी आदत नहीं
पास रहू ये मेरी किस्मत नहीं
पास रहू ये मेरी किस्मत नहीं
दूर होते हो तो बीमार -सी हो जाती हूँ ?
पास रहते हो तो सरशार -सी हो जाती हूँ ?
मांगना मेरी फितरत में नहीं हैं लेकिन --
जाने क्यों तेरी तलबगार -सी हो जाती हूँ ?
उसकी सरगोशियाँ, बेताबियाँ,जलते जज्बे,
याद आते हैं तो गुलनार -सी हो जाती हूँ ?
सोचती हूँ, कभी रूठ ही जाऊ मैं उससे---
सामने उसके मैं अक्सर लाचार -सी हो जाती हूँ ?
जब तसव्वुर में महक जाती हैं खुशबु उसकी
फूल बन जाती हूँ गुलजार -सी हो जाती हूँ ?


